Friday, February 8, 2019

तीसरी बरसी पर आपको सलाम निदा साहब !!


नील गगन पर बैठ
कब तक
चाँद सितारों से झाँकोगे

पर्वत की ऊँची चोटी से
कब तक
दुनिया को देखोगे

आदर्शों के बन्द ग्रन्थों में
कब तक
आराम करोगे

मेरा छप्पर टपक रहा है
बनकर सूरज
इसे सुखाओ

खाली है
आटे का कनस्तर
बनकर गेहूँ
इसमें आओ

माँ का चश्मा
टूट गया है
बनकर शीशा
इसे बनाओ

चुप-चुप हैं आँगन में बच्चे
बनकर गेंद
इन्हें बहलाओ

शाम हुई है
चाँद उगाओ
पेड़ हिलाओ
हवा चलाओ

काम बहुत हैं
हाथ बटाओ अल्ला मियाँ
मेरे घर भी आ ही जाओ
अल्ला मियाँ...!

- निदा फ़ाज़ली
 
तीसरी बरसी पर आपको सलाम निदा साहब !!

3 comments:

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 08/02/2019 की बुलेटिन, " निदा फ़जली साहब को ब्लॉग बुलेटिन का सलाम “ , में इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है|

Meena Bhardwaj said...

बहुत उम्दा ।

विकास नैनवाल said...

बेहद सुन्दर। सरल शब्दों में मन के भावों को खूबसूरती से स्पष्ट किया है।

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